चट्टान क्या है? चट्टानों के प्रकार | What is Rocks in Hindi? Types and Uses of Rocks

 परिचय –

आज के इस ब्लॉग पोस्ट में आपके लिए ‘चट्टान (What is Rocks in Hindi)’ के बारे में विस्ततृ जानकारी लेकर आये हैं। चट्टान क्या है (What is Rocks), चट्टान (rocks) की परिभाषा क्या है, इसके विभिन्न प्रकार एवं इसकी विशषेताएओं के बारे में विस्तार से चर्चा किया गया है। हमें आशा है कि यह ब्लॉग पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगा।

What is rocks in hindi

So let’s start now….

चट्टान क्या है? (What is rocks)

चट्टान एक ठोस पिडं (solid mass) है, जो खनिजों से मिलकर बनी है। सामान्यतः चट्टानें खनिजों का मिश्रण होता है जो बहुत सारे खनिजों से मिलकर बनी होती है तथा कुछ चट्टानें ऐसी भी होती है जो केवल एक ही खनिज से बने होते हैं । उदाहरण के लिए लाइमस्टोन चट्टान जो केवल कैल्साइट खनिज से बनी है। और ग्रेफाइट चट्टान जो कई प्रकार के खनिजों से मिलकर बनी है।

चट्टानों के प्रकार –
(Types of rocks)

चट्टानों को उनकी उत्पत्ति (origin) के आधार पर मूलतः तीन प्रमुख वर्गों में विभाजित किया गया है-

1. आग्नेय चट्टान
(Igneous rocks)

2. अवसादी चट्टान
(Sedimentary rocks)

3. रूपांतरित चट्टान
(Metamorphic rocks)

[1] आग्नेय चट्टान (Igneous Rocks)

ज्वालामुखी से निकला लावा (मैगमा) जब ठंडा होकर ठोस रूप में एकत्रित होता है। तो इसे ‘आग्नेय चट्टान (Igneous Rocks)’ कहते हैं। इसे अंग्रेजी भाषा में igneous rocks कहते हैं।

इसलिए  कहा जाता है कि ’वे चट्टाने जिनकी उत्पत्ति लावा या मैगमा के ठंडे होने से होती है, आग्नेय चट्टानें है।

जब पृथ्वी गर्म गैसों की गोला थी और ठंडा हुई तो उसी समय आग्नेय चट्टानों का निर्माण हुआ। और आज भी वर्तमान में आग्नेय चट्टानों का निर्माण हो रहा है जहां ज्वालामुखी का उद्गार होता है।

आग्नेय चट्टानों के अन्य नाम –

इसे पेरेंट्स रॉक्स (Parents rocks) भी कहते हैं क्योंकि आग्नेय चट्टानों से ही अन्य चट्टाने बनी होती है। आग्नेय चट्टानों को प्राइमरी रॉक्स (Primary Rocks) भी कहते हैं। क्योंकि सबसे पहले इन्हीं चट्टानों का निर्माण हुआ था इसके बाद फिर बाकी चट्टाने बनी है।

आग्नेय चट्टानों की विशेषताऐ –

यह क्रिस्टलीय होते हैं परंतु क्रिस्टलों की संख्या एवं स्वरूप निश्चित नहीं होता है।

आग्नेय चट्टानें पिघले हुए गर्म पदार्थ से बनती हैं, इसलिए ये अत्यधिक कठोर और ठोस होती हैं। इन चट्टानों में जैविक अवशेष (Fossils) नहीं मिलते । इनमें लेयर्स नहीं पाए जाते हैं। इसलिए इसे स्तरहीन चट्टाने भी कहते हैं।

इसमें चुम्बकीय लोहा, निकिल, तांबा, सीसा, जस्ता, क्रोमाइट, मैगनीज, सोना और प्लेटिनम पाये जाते हैं।

अर्थ क्रस्ट (Earth Crust)  का 95% भाग इन्हीं चट्टानों से बना होता है।

आग्नेय चट्टानों के उदाहरण –

a. ग्रेनाइट (Granite)

b. बेसाल्ट (Bessalt)

c. गैब्रो ( Gabro)

d. क्वार्ट्ज (Quartz)

e. सीयेनाइट (siyenite)

f. डायोराइट (Diorite)

g. रायोलाइट (Ryolite)

 

आग्नेय चट्टानों की निर्माण प्रक्रिया –

ज्वालामुखी से निकलनेवाला लावा पृथ्वी के सतह पर आकर फैल जाता है और बाहर के वातावरण में ठंडा होकर चट्टान बन जाता है। और कुछ लावा पृथ्वी के अंदर ही रह जाती है और वहीं पर ठंडा होकर ठोस रूप धारण कर लेता है और चट्टान में परिवर्तित हो जाती है।

आग्नेय चट्टानों के प्रकार (Types of Igneous Rocks)

आग्नेय चट्टानों को उनकी स्थितिसिलिका की मात्रा के अनुसार दो अलग। – अलग वर्गों में विभाजित किया गया है – (आग्नेय चट्टानों के प्रकार 01 व 02 के रूप में जो नीचे दिए गए हैं )

आग्नेय चट्टानों के प्रकार – 01

आग्नेय चट्टानों (igneous rocks) को उनकी स्थिति के आधार पर दो वर्गों में विभाजित किया गया है-

a. Intrusive rocks

b. Extrusive rocks

 

A. Intrusive rocks –

इन चट्टानों को हिंदी भाषा में अन्तः निर्मित चट्टानें भी कहते हैं। जब लावा पृथ्वी के अंदर ही ठंडा होकर चट्टान में परिवर्तित हो जाता है तो उन चट्टानों को Intrusive Rocks चट्टानें कहते हैं।

उदाहरण– इन चट्टानों में ग्रेनाइट, क्वार्ट्ज, सियेनाइट, डायोराइट आदि प्रमुख चट्टानें हैं।

सामान्यतः अन्तः चट्टानें (Intrusive rocks) दो प्रकार की होती है-

1. पातालीय अन्तः निर्मित
(Plutonic Intrusive rocks)

2. मध्यवर्ती अन्तः निर्मित
(Hypabyssal Intrusive rocks)

1. Plutonic Intrusive rocks :- भ-ूपटल में अधिक गहराई पर पाई जाने वाली आग्नेय चट्टानों को Plutonic Intrusive rocks कहते हैं। इनका निर्माण मग्मा के अधिक गहराई पर ठंडे हो जाने के कारण होता है। ग्रेनाइट इस प्रकार की चट्टानों का उदाहरण है।

2. Hypabyssal Intrusive Rocks :- भूपटल में बहुत कम गहराई पर पाई जानेवाली चट्टानों को Hypabyssal Intrusive Rocks कहते हैं। इनका निर्माण मैगमा के अपेक्षाकृत कम गहराई पर ठंडे हो जाने के कारण होता है।

लैकोलिथ, बैथोलिथ, फैकोलिथ, लैपोलिथ आदि इन चट्टानों के उदाहरण हैं।

 

B. Extrusive rocks –

इसे हिंदी भाषा में बाह्य चट्टानें भी कहते हैं। जब पिघला हुआ लावा पृथ्वी की सतह पर आकर ठंडा हो जाता है। तो ठंडा होने के बाद बनी चट्टानों को एक्सट्रूसिव रॉक्स (Extrusive Rocks) कहते हैं ।

इस प्रकार की चट्टानें अधिकतर ज्वालामुखी के विस्फोट के समय बनती हैं, इसलिए इन्हें ज्वालामुखी चट्टानें भी कहते हैं। इन चट्टानों में बेसाल्ट एवं रायोलाइट प्रमुख चट्टाने हैं।

 

आग्नेय चट्टानों के प्रकार – 02 

सिलिका की मात्रा के अनुसार आग्नेय चट्टानों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है –

1. Acidic rocks

इस प्रकार के चट्टानों में 65 से 85% प्रतिशत सिलिका पाया जाता है।

उदाहरण – सीयेनाइट, स्ट्रैचाइट।

 

2. Intermediate rocks

इस प्रकार के चट्टानों में 55 से 65% सिलिका पाया जाता है।

उदाहरण – डायोराइट, एंडीसाइड।

 

3. Basic rocks

इस प्रकार की चट्टानों में 45 से 55% सिलिका पाया जाता है।

उदाहरण – बेसाल्ट, गैब्रो।

 

[2] अवसादी/परतदार चट्टान (Sedimentary rocks)

जिन चट्टानों में व्यवस्थित परतें होती हैं, उन्हें अवसादी (परतदार) चट्टानें कहते हैं। इनका निर्माण अपरदन के तत्वों, जैसे – नदियों आदि के द्वारा बहाकर लाये गये पदार्थों के जमाव से होता है। अवसादी चट्टान को अंग्रेजी भाषा में sedimentary rocks कहते हैं।

इन चट्टानों के निर्माण में लगी हुई सामग्री को अवसाद (sediment) कहते हैं इसलिए यह चट्टाने अवसादी चट्टाने (sedimentary rocks) कहलाती है।

अवसादी चट्टानों की निर्माण प्रक्रिया –

हवा और जल द्वारा आग्नेय चट्टानों का अपक्षय (weathing) होता है। जिससे यह छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाती है अपक्षय (weathing) से प्राप्त इन छोटे-छोटे टुकड़ों को हवा और पानी अपने साथ बहा कर दूसरे स्थानों पर ले जाते हैं। दूसरे स्थान पर जाकर यह छोटे-छोटे टुकड़े परतों के रूप में एकत्र हो जाते हैं। इन परतों पर जब हाई प्रेशर और हाई टेंपरेचर का प्रभाव पड़ता है तो इसमें सीमेंटीकरण की प्रक्रिया होती है जिससे यह ठोस चट्टान में परिवर्तित हो जाता है। इसके अतिरिक्त वनस्पति एवं जन्तुओ की अवशषे भी संग्रहित होकर ऐसी चट्टानों का निर्माण करते हैं।

उदाहरण – Coal, slate.

अवसादी (परतदार) चट्टानों के उदाहरण-

a. बलआु पत्थर (Sendstone),

b. चुना पत्थर (Limestone),

c. चाॅक( Chalk),

d. क्ले (Clay),

e. शैल (Shale)

f. कोयला (Coal)

g. पीट (Peat)

h. सेंधा नमक पत्थर (Salt rock)

j. जिप्सम (Gypsum)

k. डोलोमाइट (Dolomite)

 

अवसादी चट्टानों की विशेषताएं – 

यह चट्टाने सदैव परतों के रूप में मिलती है। यह इनकी प्रमुख विशेषता है, क्योंकि अन्य चट्टानों में परतें नहीं होती।

परतदार चट्टानों का निर्माण आग्नेय एवं रूपांतरित चट्टानों के टुकड़ों एवं धूल , वनस्पति , जीव जन्तुओ के अवशेष आदि से हुआ है। इसलिए इन चट्टानों में पेट्रोलियम पदार्थ और फॉसिल्स (fossils) पाए जाते हैं।

अधिकांश परतदार चट्टानें क्षैतिज (Horizontal) रूप में पायी जाती है।

ये चट्टानें अपेक्षाकृत कम कठोर होती है इसलिए अपक्षय एवं अपरदन जल्दी हो जाता है।

 

[3] रूपांतरित चट्टान (Metamorphic Rocks)

हाई टेंपरेचर और हाई प्रेशर के कारण आग्नेय चट्टानों और अवसादी चट्टानों के रंग, स्वरूप और संगठन में परिवर्तन के फलस्वरुप बनी चट्टानों को रूपांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks) कहते हैं।

रूपांतरित चट्टानों को अंग्रेजी भाषा में metamorphic rocks कहते हैं।

रूपांतरित चट्टानों के उदाहरण –

Rocks in Hindi

 

 

रूपांतरित चट्टानों की निर्माण प्रक्रिया :-

अत्यधिक तापमान और अत्यधिक दबाव के कारण आग्नेय चट्टान और अवसादी चट्टान के भौतिक एवं रासायनिक गुणों में परिवर्तन हो जाता है। जिससे इन चट्टानों का रंग, स्वरूप, संगठन और खनिजों के गुणों में पूर्ण तरीके से परिवर्तन हो जाता है।

इसके साथ-साथ चट्टान की कठोरता बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए इन चट्टानों का अपक्षय और अपरदन धीरे-धीरे होता है। इन चट्टानों का अधिक ताप के कारण केवल रंग और स्वरूप बदलता है, उनका विघटन (Decomposition) अथवा वियोजन (Disintagration) नहीं होता।

जब कभी अत्यधिक परिवर्तन हो जाता है, तो उसके मूल रूप को पहचानना भी कठिन हो जाता है। चट्टानों में रूपांतरण शीघ्रता से तथा धीरे-धीरे भी हो सकता है।

मूल चट्टानों में परिवर्तन पाँच प्रकार से होता है-

1. तापीय रूपांतरण
(Thermal Metamorphism)

2. जलीय रूपांतरण
(Hydro-Metamorphism)

3. ताप-जलीय रूपांतरण
(Hydro-Thermal Metamorphism)

4. गतिक रूपांतरण
(Dynamic Metamorphism)

5. स्थैतिक रूपांतरण
(Statics Metamorphism)

 

1. Thermal Metamorphism:-

पृथ्वी के आंतरिक भाग में स्थित मैगमा के सम्पर्क से चट्टानों का स्वरूप बदल जाता है। इसे तापीय रूपांतरण (Thermal Metamorphism) कहते हैं।

इस प्रकार का परिवर्तन सामान्यतः ज्वालामुखी उद्भेदन के समय होता है। चुना पत्थर का रूपांतरण मैगमा के सम्पर्क के कारण ही होता है। इसी प्रकार बलआु पत्थर (Sandstone) से क्वार्टजाइट का निर्माण होता है।

चट्टान का जो भाग मैगमा के अधिक सम्पर्क में रहता है, उसका परिवर्तन अधिक होता है, मैगमा से जैसे – जैसे दूरी बढ़ती जाती है, परिवर्तन भी क्रमशः घटता जाता है।

 

2. Hydro-Metamorphism:–

महासागरों में स्थित जल की विशाल मात्रा के भार के कारण तली में स्थित चट्टानों में परिवर्तन हो जाता है, इसे जलीय रूपांतरण (Hydro-Metamorphism) कहते हैं। इस प्रकार का परिवर्तन सीमित क्षेत्रों में तथा बहुत कम होता है।

 

3. Hydro-Thermal Metamorphism:-

यह रूपांतरण ताप एवं जलीय भार के कारण होता है। सामान्यतः इस रूपांतरण का प्रभाव कम ही दिखाई देता है।

 

4. Dynamic Metamorphism:-

भूपटल के भीतर चट्टानों के क्षैतिज अथवा ऊर्ध्वाधर खिसकने से उत्पन्न घर्षण एवं ताप के कारण यह रूपांतरण होता है। इस रूपांतरण में समय बहुत अधिक लगता है।

उदाहरण-शैल (Shale) से स्लेट (Slate),  कोयला से ग्रेनाइट का बनना। सामान्यतः यह रूपांतरण पर्वतीय क्षेत्रों में ही होता है।

 

5. Statics Metamorphism:-

ऊपरी चट्टानों के दबाव के कारण नीचे स्थित चट्टानों में परिवर्तन होता है, तो उसे स्थैतिक रूपांतरण (Statics Metamorphism) कहते हैं । इसे दाब रूपांतरण भी कह सकते हैं। भूपटल की बहुत सी चट्टानें इस प्रकार रूपांतरित हो जाती है।

 

चट्टानों का उपयोग (Uses of rocks)

वैसे तो पत्थरों का उपयोग हमारे दैनिक जीवन के ढेर सारे कार्यों में किया जाता है और पत्थरों का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका है। हमने कुछ चुनिंदा उपयोगों को आपके लिए नीचे प्वाइंट आउट किया है –

• Fuel

• coal

• paints

• making cement

• salt

• slate

• marble rock and tiles

• Granite tiles

• Tiles

• building material

• boundary wall

• light house

• foundation construction

• स्टोन एज में हथियारों के रूप में नुकीले पत्थरों का उपयोग किया जाता था।

 

निष्कर्ष :-

खनिजों के मिश्रण से निर्मित ठोस पिण्ड को चट्टान कहते हैं।

पृथ्वी पर मुख्यतः तीन प्रकार की चट्टाने पाई जाती है :- आग्नेय चट्टान, अवसादी चट्टान और रूपांतरित चट्टान।

आग्नेय चट्टान, मूल चट्टान है सबसे पहले इन्हीं चट्टानों का निर्माण हुआ था।

पिघले लावे के ठंडे होने पर आग्नेय चट्टानों का निर्माण होता है।

आग्नेय चट्टानों के अपक्षय (weathing) से प्राप्त पदार्थों से अवसादी चट्टानों का निर्माण होता है।

जब आग्नेय और अवसादी चट्टानों पर उच्च दाब और ताप का प्रभाव पड़ता है, तो इनके रासायनिक और भौतिक गुणों में परिवर्तन हो जाता है। और परिवर्तन के फल स्वरुप रूपांतरित चट्टानों का निर्माण होता है।

रेफरेंस 

यू.पी.एस.सी. डॉट कॉम, बुक ऑफ सॉयल साइंस बाय विनय सिंह तथा अन्य स्त्रोतों में प्रकाशित सामग्री का विश्लेषण करके इस पोस्ट को लिखा गया है। और आवश्यकतानुसार, यथा स्थान Agrifieldea टीम के इनपटु भी शामिल किए गए हैं।

अपील

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Frequently asked questions –

Qus..- चट्टान किसे कहते हैं?
Ans.- खनिजों के मिश्रण से बनी ठोस पिण्ड को चट्टान कहते हैं।

Qus. – चट्टान कितने प्रकार (Type of Rocks) की होती है ?

Ans. – चट्टाने तीन प्रकार की होती है –

1. आग्नेय चट्टान
(Igneous rocks)

2. अवसादी चट्टान
(Sedimentary rocks)

3. रूपांतरित चट्टान
(Metamorphic rocks)

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